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नोटबंदी, जीएसटी के बाद अब एफडीआई से व्यापारियों पर मार : केजरीवाल



दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार की सुबह एक बार फिर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा है कि सरकार ने व्यापारियों को एक साल में तीसरी मार दी है. नोटबंदी और जीएसटी के बाद अब सरकार एफडीआई ला रही है.
केजरीवाल ने ट्वीट किया, 'एक साल में व्यापारियों पर तीन मार - पहले नोटबंदी, फिर GST और अब FDI. छोटे और मंझले व्यापारियों के लिए तो जैसे मरने जैसी नौबत आ गई है.' एक साल में व्यापारियों पर तीन मार - पहले नोटबंदी, फिर GST और अब FDI. छोटे और मँझले व्यापारियों के लिए तो जैसे मरने जैसी नौबत आ गयी है।

सिंगल ब्रैंड रिटेल में अब ऑटोमेटिक रूट से 100% FDI की मिली इजाजत
सिंगल ब्रैंड रिटेल कंपनियों में अब ऑटोमेटिक रूट के जरिये 100 फीसदी विदेशी निवेश की इजाजत दे दी गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया. इसके अलावा एविएशन और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में भी एफडीआई नियमों में छूट दी गई है. आपको बता दें कि इस फैसले से इन सेक्टर्स में निवेश बढ़ेगा. साथ ही, विदेशी कंपनियां अब भारत में आसानी से निवेश कर पाएंगी. लिहाजा ऐसे में नए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे.

क्या है नया फैसला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में एफडीआई (फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट) नियमों को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है. नए फैसले के तहत सिंगल ब्रैंड रिटेल में ऑटोमैटिक रूट से 100 फीसदी एफडीआई को मंजूरी दे दी गई. इससे पहले एफडीआई के तहत निवेश करने पर सरकार से मंजूरी लेनी पड़ती थी, लेकिन अब सभी शर्तें पूरी करने पर कैबिनेट से मंजूरी नहीं लेनी होगी. अगर आसान शब्दों में समझें तो निवेश मंजूरी की प्रक्रिया बेहद आसान हो जाएगी.

इससे क्या होगा
वीएम पोर्टफोलियो के हेड विवेक मित्तल ने न्यूज18हिंदी को बताया कि यह फैसला रिटेल कंपनियों के लिए बड़ी राहत की खबर है. सिंगल ब्रैंड रिटेल में 100 फीसदी एफडीआई तो पहले से था, लेकिन ऑटोमेटिक रूट्स के जरिए निवेश को मंजूरी से कंपनियों के लिए निवेश करना आसान हो जाएगा. विदेशी कंपनियां अब भारत में किसी भी कंपनी को आसानी से खरीद सकती है. साथ ही, विस्तार करने के लिए उन्हें सरकार से मंजूरी नहीं लेनी होगी. लिहाजा ऐसे में नए प्लांट भी लगेंगे और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे.

क्या है FDI
सामान्य भाषा में समझें तो किसी एक देश की कंपनी का दूसरे देश में किया गया निवेश प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी एफडीआई कहलाता है. ऐसे निवेश से निवेशकों को दूसरे देश की उस कंपनी के प्रबंधन में कुछ हिस्सा हासिल हो जाता है जिसमें उसका पैसा लगता है. आमतौर पर माना यह जाता है कि किसी निवेश को एफडीआई का दर्जा दिलाने के लिए कम-से-कम कंपनी में विदेशी निवेशक को 10 फीसदी शेयर खरीदना पड़ता है. इसके साथ उसे निवेश वाली कंपनी में मताधिकार भी हासिल करना पड़ता है.

एफडीआई के फायदे
एफडीआई से विदेशी निवेशक और निवेश हासिल करने वाला देश, दोनों को फायदा होता है. निवेशक को यह नए बाजार में प्रवेश करने और मुनाफा कमाने का मौका देता है. विदेशी निवेशकों को टैक्स छूट, आसान नियमों, लोन पर कम ब्याज दरों और बहुत सी बातों से लुभाया जाता है. एफडीआई से घरेलू अर्थव्यवस्था में नई पूंजी, नई प्रौद्योगिकी आती है और रोजगार के मौके बढ़ते हैं और इस तरह के बहुत से फायदे होते हैं.

विरोध शुरू
सिंगल ब्रैंड रीटेल में ऑटोमैटिक रूट से 100 प्रतिशत एफडीआई की इजाजत दी जाने का विरोध शुरू हो गया है. ऑल इंडिया ट्रेडर्स कंफेडेरशन (महासंघ) (CAIT) ने इसका विरोध करते हुए कहा है ऐसा करके बीजेपी ने अपना चुनावी वादा तोड़ा है क्योंकि इससे बाहर की बड़ी कंपनियां भारत की मार्केट पर कब्जा कर लेंगी.