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सफाई, पर्यटन के बाद दुनिया को राजस्थानी संस्कृति दिखाने में भी असफल राजे सरकार



पैमाना चाहे स्वच्छ भारत अभियान के सर्वेक्षण का हो या फिर देशी-विदेशी पर्यटकों की सुविधा का। सभी स्थानों पर राजस्थान की राजे सरकार असफल नजर आती है। इस क्रम में एक और असफलता जुड़ गई है वह है दिल्ली में होने वाली गणतंत्र ​दिवस परेड में राजस्थान राज्य कि झांकी का सम्मलित नहीं होना। दरअसल लगातार दूसरे वर्ष राजस्थान की संस्कृति को दर्शाने वाली झांकी को परेड में सम्मलित होने का मौका नहीं मिल रहा है। झांकीयों को हरी झण्डी देने वाली समिति ने यह निर्णय किया है।
राजपथ पर होने वाली परेड में झांकियों का चयन रक्षा मंत्रालय की उच्च स्तरीय कमेटी करती है। इस वर्ष राजस्थान से जो डिजाइन भेजा गया था वह मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के पंसदीदा प्रोजेक्ट जल स्वावलंबन का था। जिसे कमेटी ने यह कहकर अस्वीकार कर दिया है ​कि इस ​डिजाइन में राजस्थान की संस्कृति की झलक नजर नहीं आती है। लगातार दूसरे वर्ष गणतंत्र दिवस की ऐतिहासिक परेड में राजस्थान की झांकी का सम्मलित नहीं होना राजस्थान सरकार और प्रदेश की नौकरशाही के रवैये पर सवाल जरुर लगाता है।

जानकारी के अनुसार परेड में विभिन्न राज्यों की करीब 14 झांकियों को जगह दी जाती है। जिसके चयन की प्रक्रिया प्रति वर्ष सितंबर में प्रारंभ हो जाती है। यह कार्य रक्षा मंत्रालय की उच्च स्तरीय कमेटी करती है। इस कमेटी को ​विभिन्न राज्य अपने झांकी  के डिजाइन भेजते है। इसके बाद एक तय समय अंतराल में इन मॉडल की समीक्षा होती है। जिसके बाद एक पांच फीट का मिनी मॉडल तैयार कर अंतिम रुप दिया जाता है।

राजस्थान की पहचान दुनिया भर में उसकी संस्कृति और पर्यटन स्थलों से है। लेकिन सरकारी ताना बाना केवल मुख्यमंत्री को खुश करने और कागजी सरकारी योजनाओं के ढोल पीटने में लगा हुआ है। राजस्थान में पर्यटक स्वयं को कितना असुरक्षित महसूस करते है इसका अंदाजा  इसी से लगाया जा सकता है कि हाल ही में हुए इंटनेशनल जयपुर फिल्म फेस्टिवल में कई ​हॉलीवुड फिल्म मेकर ने आने से मना कर दिया था। उनका कहना था कि जयपुर की सड़कों पर घूमने वाले आवारा सांड परेशानी का सबब है।

स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत स्वच्छत सर्वेक्षण देश भर के शहरों में हो रहा है। इसी के कारण इन दिनों जयपुर व राजस्थान के अन्य शहरों में सफाई के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। लेकिन बीते वर्ष की रिपोर्ट ओर कुछ दिन पूर्व तक की स्थिति बेहद ​चिंतनीय है। कुछ दिन पूर्व ही जयपुर नगर निगम में शहर के एक बस्ती के लोग लोटा लेकर पहुंच गए थे। उनका कहना था कि उनके क्षेत्र में अभी तक शौचालय नहीं बने है। गौरतलब है बीते वर्ष की स्वच्छता सूची में जयपुर शुरुआत 100 शहरों में भी सम्मलित नहीं था।
न्यूज़ - अमर उजाला